इन दिनों अलग-अलग स्तर पर सेना में अहीर रेजीमेंट की मांग उठ रही है। 15 मार्च को सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने संसद में इसकी मांग उठाई थी। वहीं आज मध्य प्रदेश के कांग्रेस के नेता अरुण यादव ने भी इसकी मांग की।
अहीर रेजिमेंट का हो गठन
कलेक्ट्रेट पहुंच कर रक्षा मंत्री के नाम लिखे गए पत्र के माध्यम से मांग की गई कि भारतीय सेवा में जिस प्रकार क्षेत्रीय और जातीय आधार पर 25 से ज्यादा रेजीमेंट हैं। ठीक उसी प्रकार रेजांगला और कारगिल में शहादत देने वाले यादव यानी अहीर समाज के लिए भी अहीर रेजिमेंट का गठन होना चाहिए।
खिलाड़ियों ने बताया कि साल 1962 के युद्ध में कुमाऊं रेजिमेंट की 13वीं बटालियन के अहीर सैनिकों ने चीनी हमले का डटकर सामना किया था। इस बटालियन के 117 जवानों में से 114 जवान अहीर थे। इनमें से सिर्फ तीन जवान ही जिंदा बचे थे और उन्हें भी गंभीर चोट लगी थी। मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में जवानों ने चीन को खूब छकाया था।
पूरी इन्फेंट्री रेजीमेंट की उठाई मांग
अहीर समाज के लोगों ने कहा कि उन्हें अपने नाम पर एक पूरी इन्फेंट्री रेजीमेंट मिलनी चाहिए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कई जिलों के युवाओं ने नारेबाजी करते हुए मांग की कि उनके शहीद हुए सैनिकों के सम्मान और स्वाभिमान के लिए भारतीय सेना में रेजीमेंट चाहिए।
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